“Vaishnav Janato”

He who feels the pain of another That is vaishnav  Help those in need And stays humble forever That is vaishnav He who bows to every soul Doesn't slander anyone Whose words are just as pure as his heart Hail the mother who gave birth to such a soul Because that is vaishnav He who … Continue reading “Vaishnav Janato”

सफ़र

जिंदगी का ये सफर कुछ इस तरह चलता जा रहा है। है खबर मुझको नहीं ये किस तरह चलता जा रहा है। सोचती हूं रोज मैं कि आज कुछ होगा नया फिर वही पुराना कारवां चलता जा रहा है। है मन में कई आशाएं प्रगति पथ पर चलने की और यह संघर्ष आगे बढ़ता जा … Continue reading सफ़र

Spirituality

Materiality can give us all the comforts of life but spirituality provides the right direction to our life. True spiritual happiness, peace & steady bliss can only be found in the shade of a spiritually planted tree. Therefore, definitely plant a tree of spirituality in the garden of your life.

कृष्ण सुधा…

श्याम तेरे मुख ऊपर वारी। कमल नयन घनश्याम मनोहर बलि - बलि जाऊं रूप पर वारी। नेह सहित देखूं तेरी चितवन छिन ही छवि नहीं जात बिसारी। सुंदर श्याम सुभग तन लागत अति आनंद देत किलकारी। मधुर वेणु धुनि सुनत मगन भए सुध बुध अब नहीं जात विचारी। निरख निरख मन में हरषावत करतल ताल … Continue reading कृष्ण सुधा…

शिक्षा ज्ञान विज्ञान पर आधारित हो

From : Gulabkothari's Blog Chief Editor : Rajasthan patrika एक शिक्षा का पहला लक्ष्य है-ज्ञानार्जन। ज्ञान और ब्रह्म पर्याय शब्द हैं। हम सब ब्रह्माण्ड की प्रतिकृति हैं, अत: ‘अहं ब्रह्मास्मि’ कहते हैं। इसीलिए व्यक्ति निर्माण का आधार ‘तत् त्वं असि’ माना गया है। शिक्षा में इसीलिए तीनों धरातलों-आधिदैविक, आध्यात्मिक तथा आधिभौतिक-का समावेश अनिवार्य कहा है। … Continue reading शिक्षा ज्ञान विज्ञान पर आधारित हो

विविधता

जीवन का आनंद इसकी विविधता में है। हर दिल अलग , हर सोच अलग। जीवन रूपी इस बगिया में अनेक फूल खिले हैं। हम सभी गुलदस्ते में रखे विभिन्न फूलों के समान है। जो अपनी-अपनी प्रकृति के अनुसार इस जहां में खुशबू बिखेर रहें हैं।

और फिर मुझसे मैं मिल जाऊं

RANU GUJRATI


कलम पकड़कर मैं बैठूं और फिर मुझसे मैं मिल जाऊं

इक अहसासों की बस्ती हो जिसमें छोटा सा मकां बनाऊं

कुछ दूर किनारे मैं बैठूं कुछ पास मैं खुद के आ सी जाऊं

कुछ मेरे बारे में सोचूं कुछ दुनिया को मैं बतलाऊं

अम्मा की चोटी करूं मैं बाबा के सिर में तेल लगाऊं

भूले बिसरे कुछ गीतों को मैं आज सिरे से फिर दोहराऊं

खुले आसमां को मैं ताकूं, पंछी बनकर मैं उड़ सी जाऊं

तारों की झिलमिल को देखूं और फिर खुद में खो सी जाऊँ

सांझ ढले एक मंदिर में एक छोटा सा दिया जलाऊं

प्रेम सुधा रस भरकर खुद में अपनों पर बरसाती जाऊं

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